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Workout ke bad Aise Rakhein Khanpan, Hoga doguna Fayada - वर्कआउट के बाद एेसा रखें खानपान, हाेगा दाेगुना फायदा

February 03, 2019
Workout ke bad Aise Rakhein Khanpan, Hoga doguna Fayada

Workout ke bad Aise Rakhein Khanpan, Hoga doguna Fayada       

Workout ke bad Aise Rakhein Khanpan, Hoga doguna Fayada  - स्वस्थ शरीर के लिए वर्कआउट के साथ उचित खानपान भी जरूरी है। ज्यादातर लोग वर्कआउट के बाद लगने वाली भूख को कंट्रोल नहीं कर पाते और न चाहते हुए भी ओवरईटिंग कर लेते हैं। यहां कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप इस आदत पर काबू पा सकते हैं :-

जरूरी है कार्ब-प्रोटीन
अल्पाहार में ऐसी चीजें शामिल करें जिनमें कार्बोहाइड्रेट व प्रोटीन हो। मूंगफली, बटर या जैम सैंडविच स्वस्थ विकल्प हो सकते हैं। वर्कआउट के दौरान पसीने से निकलने वाले फ्लूड को पानी पीकर पूरा किया जा सकता है। वर्कआउट के बाद तुरंत कुछ खाने की बजाय 15-20 मिनट रुककर खाएं।

दूध है जरूरी
कुछ हल्का खाने की बजाय कम फैट वाला दूध पीना बेहतर है। प्रोटीन होने से आपको एनर्जी मिलेगी और वर्कआउट के बाद लगने वाली भूख भी कम होगी।

खाने से पहले वर्कआउट
वर्कआउट करने के तुरंत बाद भूख लगने पर ज्यादातर लोग फास्ट फूड पर टूट पड़ते हैं, जो हैल्थ के लिए सही नहीं रहता। ऐसे फूड से बचने के लिए अपने वर्कआउट के समय को थोड़ा बदल सकते हैं। वर्कआउट का समय खाना खाने के आसपास ही रखें ताकि एक्सरसाइज करने के 15-20 मिनट बाद आप सीधा खाना ही खा सकें।

एंजॉय करें
अगर आप वर्कआउट से बोर हो गए हैं तो एक्सरसाइज की एक नई फॉर्म अपनाएं ताकि बोरियत ना हो।

जल्दी न जाएं जिम
बच्चों को 16 साल की उम्र से पहले जिम नहीं जाना चाहिए। इससे पहले वे आउटडोर गेम्स खेलें। जल्दी जिम जाने व स्टेरॉयड्स लेने से दिमाग की नसों को नुकसान होता है। साथ ही हड्डियों की ग्रोथ प्लेट्स भारी वजन उठाने से नष्ट हो सकती हैं।



Workout ke bad Aise Rakhein Khanpan, Hoga doguna Fayada - वर्कआउट के बाद एेसा रखें खानपान, हाेगा दाेगुना फायदा Workout ke bad Aise Rakhein Khanpan, Hoga doguna Fayada - वर्कआउट के बाद एेसा रखें खानपान, हाेगा दाेगुना फायदा Reviewed by health on February 03, 2019 Rating: 5

Sardiyon Mein Aise Karein Buzurgon Ki Dekhbhal - सर्दियों में एेसे करें बुजुर्गों की देखभाल

February 03, 2019
Sardiyon Mein Aise Karein Buzurgon Ki Dekhbhal

Sardiyon Mein Aise Karein Buzurgon Ki Dekhbhal     

Sardiyon Mein Aise Karein Buzurgon Ki Dekhbhal उम्रदराज लोगों को सर्दियों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने का खतरा रहता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो चुकी होती है। दूसरा, इस मौसम में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, जिससे सांस संबंधी परेशानियां बुजुर्गों को ज्यादा सताती हैं। आइए जानते हैं कुछ उपयोगी बातों के बारे में जिनसे वृद्धजन सर्दियों में सेहतमंद बने रह सकते हैं।

कार्डियोवस्क्यूलर रोग -
पारे में गिरावट का सीधा असर उम्रदराज लोगों के दिल और उसकी नसों पर पड़ता है। सर्दी के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा भी अधिक हो जाता है। इस मौसम में हम पानी कम पीते हैं जिससे नसों में क्लॉट बनने लगते हैं और हृदयाघात हो सकता है।

चलने में तकलीफ -
आर्थराइटिस से पीड़ित वृद्धजनों को सर्दियों में सावधान रहना चाहिए। इस दौरान वृद्धों की शक्ति व फुर्ती घट जाती है। चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित होने पर दुर्घटना और गिरने की आशंका बढ़ जाती है।

सांस संबंधी रोग -
वृद्धों के श्वसन तंत्र में संक्रमण होना आम है क्योंकि ज्यादा सर्दी उनकी प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देती है और फेफड़ों की कार्यप्रणाली को बिगाड़ देती है। वायरल संक्रमण या फ्लू उनकी सांस की बीमारियों को और भी बढ़ा देता है। ऐसे में उन्हें दमा व क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज में खास ख्याल रखना चाहिए।

त्वचा रोग -
सर्दियों में खुजली होना त्वचा की आम समस्या है, यह वृद्धों को ज्यादा होती है। सूखी और ठंडी हवाएं त्वचा पर बुरा असर डालती हैं। ठंड के ज्यादा संपर्क में आने से लगातार खुजली बनी रहती है और अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

मानसिक व सामाजिक बाधाएं -
सर्दियों में अकेले रहने से तनाव और अवसाद घेरने लगता है। इनका विपरीत प्रभाव बुजुर्गों में स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में नजर आता है। इसलिए उम्रदराज लोगों को अकेला न रहने दें और खयाल रखें कि वे किसी न किसी एक्टिविटी में व्यस्त रहें।

व्यायाम से फिट रहें -
वॉक, योगा, एरोबिक्स जैसे हल्के व्यायाम वृद्धों के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। मॉर्निंग वॉक जरूर करें क्योंकि सुबह के समय वातावरण में प्रदूषण और ज्यादा शोर नहीं होता है।

विशेषज्ञ की राय -
सर्दी के दिनों में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं (जिन लोगों को ज्यादा तरल लेने की मनाही है, वे ऐसा न करें), गर्म भोजन करें, भीड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें, ज्यादा प्रदूषण के समय बाहर न निकलें, जंकफूड से परहेज करें, अगर कोई दवा ले रहे हैं तो उसे नियमानुसार लें और सफर में जाते समय भी अपने साथ लेकर जाएं, कम से कम 6-8 घंटे की नींद जरूर लें और मौसमी सब्जियों व फलों को डाइट में शामिल करें।

उचित खानपान -
बुजुर्गों को सर्दियों में पौष्टिक आहार लेना चाहिए। वसा युक्त और मसालेदार भोजन से परहेज करें। ऐसी चीजों से भी बचें जिनसे कफ बढ़ता है जैसे दुग्ध उत्पाद, केक, पेस्ट्री, मैदा व सफेद ब्रेड। घी-मक्खन का भी प्रयोग कम ही करें। अदरक वाली चाय व सब्जियों का सूप पी सकते हैं।



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Jaan Lein Bhojan Karne Ke In Niyamon Ke Bare Mein - जान लें भोजन करने के इन नियमों के बारे में

February 03, 2019
Jaan Lein Bhojan Karne Ke In Niyamon Ke Bare Mein

Jaan Lein Bhojan Karne Ke In Niyamon Ke Bare Mein     

Jaan Lein Bhojan Karne Ke In Niyamon Ke Bare Mein  - स्वस्थ रहने के लिए भोजन जरूरी है, लेकिन इसके भी कुछ नियम होते हैं। अगर संतुलित भोजन खुश होकर किया जाए तो शरीर को ज्यादा लाभ होता है।

ध्यान रहें ये बातें -
स्वच्छता भोजन का पहला नियम है। इसलिए खाना खाने से पहले हाथ, पैर और मुंह अच्छी तरह से धो लेने चाहिए। जिस स्थान पर भोजन करने के लिए बैठें, वह साफ होना चाहिए। भोजन हमेशा खुशनुमा माहौल में करें और खाते समय बातचीत न करें।

चबा-चबाकर खाएं -
भोजन करते समय प्रत्येक कोर को कम से कम 30 से 40 बार चबाएं। जब हम खाना ठीक से चबाते नहीं हैं तो दांतों का काम आंतों को करना पड़ता है और वे कमजोर हो जाती हैं। इसलिए भोजन चबाकर ही खाएं। भूख से थोड़ा कम खाएं और एक निश्चित समय पर खाना खा लें। खाने के बाद फौरन पानी न पिएं क्योंकि इस दौरान पेट में ऐसे रस बनते हैं जो खाने को पचाने का काम करते हैं। लेकिन जब हम पानी पी लेते हैं तो वे खाने के साथ घुल जाते हैं और भोजन ठीक से पच नहीं पाता। लगातार ऐसा करते रहने से कब्ज और अपच की समस्या रहने लगती है,इसलिए खाने के कम से कम आधा घंटा बाद ही पानी पीना चाहिए।

रेशेवाला आहार लें -
आदर्श भोजन वही है जिसमें सभी पोषक तत्त्वों का समावेश हो। भोजन में सलाद, अंकुरित अनाज और हरी सब्जियों को जरूर शामिल करें। ये फाइबर फूड शरीर में पाचन क्रिया को दुरुस्त बनाए रखते हैं। तले-भुने, बासी और मैदा युक्त चीजों से परहेज करें। भोजन के साथ या बाद में फौरन चाय और कॉफी न लें क्योंकि ये हमारी पाचन प्रक्रिया में बाधा पहुंचाती हैं। डाइट में फलों को भी शामिल करें। रस निकालने की प्रक्रिया के दौरान फलों में मौजूद फाइबर निकल जाता है इसलिए इनका रस पीने की बजाय उन्हें चबाकर खाएं।

दिन में खाएं दालें -
दालों का समूह गैस्ट्रिक होता है इसलिए रात के समय इन्हें खाने से इनके पोषक तत्व शरीर में ठीक से एब्जॉर्ब नहीं हो पाते। अगर आप शाम को जल्दी खाना खा लेते हैं तो डिनर में दाल ले सकते हैं वर्ना इन्हें दिन के समय ही खाएं। दाल में अमिनो एसिड नहीं होता है इसलिए सिर्फ दाल ना खाकर दाल-चावल या खिचड़ी के रूप में खाएं। खाना बनाने से पहले सब्जियों और दालों को अच्छी तरह से धोना चाहिए। शेष बचे हुए खाने को ढंककर ही फ्रिज में रखें। ज्यादा देर तक भोजन को पकाएं नहीं, इससे उसमें मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा कम हो जाती है।



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For many reasons abdominal pain, know about it - कई कारणों से होता है पेटदर्द, जानें इसके बारे में

February 03, 2019
For many reasons abdominal pain, know about it

For many reasons abdominal pain, know about it      

For many reasons abdominal pain, know about it - अपच, एसिडिटी, बच्चों के पेट में कीड़े, किडनी में पथरी, अल्सर और कई मामलों में अपेंडिक्स की वजह से पेटदर्द हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और वयस्कों को अलग-अलग कारणों से इस दर्द की शिकायत हो सकती है। आइए जानते हैं उनके बारे में।

बच्चों के लिए -
दूध न पचने, पेट न भरने, पेट साफ न होने, संक्रमण या कीड़े होने, जंकफूड और तला-भुना भोजन ज्यादा खाने से बच्चों को पेटदर्द की समस्या हो सकती है।

वृद्धों की तकलीफ -
बुजुर्गों को कब्ज और यूरिन इंफेक्शन की वजह से पेटदर्द हो सकता है। कई बार ज्यादा तला-भुना खाने से भी तकलीफ हो सकती है।

जब वयस्क हों परेशान -
ऐसे लोग जिन्हें बचपन से ही कब्ज की शिकायत रही हो, उन्हें आगे चलकर पेट संबंधी समस्याएं जैसे दर्द, अपच, मरोड़, एसिडिटी की तकलीफ रहने लगती है।

एहतियात जरूरी -
यूरिन इंफेक्शन की शिकायत होने पर दिन में 3-4 लीटर पानी पिएं और पेशाब को रोककर न रखें। तनाव कम लें और बच्चों को घर का बना हुआ खाना ही दें। व्रत या उपवास करने पर फलाहार करें, कई बार खाली पेट रहने से भी पेटदर्द हो सकता है।

लक्षणों के अनुसार इलाज -
पेट में भारीपन लगने पर पल्सेटिला दवा देते हैं। खट्टी डकारों में लाइकोपोडियम, खाली पेट एसिडिटी बनने पर एनाकार्डियम दवा या खाने के दुष्प्रभाव से दर्द होने पर नक्सवोमिका दी जाती है। पेट में कीड़े होने पर सिना व पथरी के दर्द में लाइकोपोडियम, बरबरिफ वल्गेरिस व सारसापरिला दवाएं दी जाती है। अपेंडिक्स में इच्निशिया, आइरिश टेनक्स देते हैं। इन दवाओं को विशेषज्ञ मरीज के लक्षणों के अनुसार देते हैं इसलिए इनका प्रयोग स्वयं न करें।



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Doodh Se Payei Khili Khili Taucha - दूध से पाएं खिली-खिली त्वचा

February 02, 2019
Doodh Se Payei Khili Khili Taucha

Doodh Se Payei Khili Khili Taucha     

Doodh Se Payei Khili Khili Taucha  - पाेषक तत्वाें से भरपूर दूध केवल सेहत ही नहीं बनाता बल्कि चेहरे की सुंदरता बढ़ाने में भी जबरदस्त काम करता है। दूध का उपयाेग कर कुछ घेरेलू टिप्स से आप कुछ ही मिनटाें में खूबसूरत, चमकदार आैर मुलायम त्वचा पा सकते हैं। आइए जानते हैं दूध से कैसे बढ़ाएं चेहरे का निखार :-

- गुलाब की पखुंडियों को पीसकर आधा ग्लास कच्चे दूध में 30 मिनट तक भिगोएं, फिर इस पेस्ट को धीरे-धीरे पूरे चेहरे पर लगाएं। थोड़ी देर बाद इसे हल्के हाथ से मलें , सूखने पर ठंडे पानी से धुल दें, त्वचा गुलाबी और नर्म हो जाएगी।

- त्वचा को साफ करने के लिए दूध एक बेहतरीन क्लींजर है। कच्चे दूध में कॉटन का एक टुकड़ा डुबोएं और इससे चेहरे को साफ करें। उसके बाद साफ पानी से चेहरे को धो लें। अगर आप हर रोज कच्चे दूध से अपना चेहरा साफ करेंगी तो आपकी त्वचा खिल उठेगी।

- ड्राई त्‍वचा के लिए हर रोज दो चम्मच दूध की मलाई में एक चम्मच शहद मिलाकर अपनी त्वचा पर लगाएं। इससे त्वचा की खुश्की खथ्म होगी और आपकी त्वचा ग्लो करने लगेगी।

- दूध से भी आप डबल चिन की समस्या निजात पा सकती हैं। इसे टोनर के रूप में लगाएं। दूध से चिन की मसाज करें और चेहरे को गुनगुने पानी से साफ कर लें।

- दूध और शहद का फेस मास्क भी कारगर उपाय है। इस फेस मास्क को 10 मिनट तक चेहरे पर लगाने के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। इससे डबल चिन कम होगी। इसी तरह दो अंडे के सफेद वाले हिस्से में एक चम्मच दूध, थोड़ा-सा पिपरमिंट एसेंशियल ऑयल, एक चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस डालकर मिलाएं। नियमित रूप से यह फेस मास्क लगाने से भी डबल चिन समस्या से छुटकारा मिलेगा।



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Unborn baby does not have cerebral palsy, do it like this - गर्भस्थ शिशु काे ना हाे सेरेब्रल पैल्सी, इस तरह से करें बचाव

February 02, 2019
Unborn baby does not have cerebral palsy, do it like this

Unborn baby does not have cerebral palsy, do it like this        

Unborn baby does not have cerebral palsy, do it like this - भारत में सेरेब्रल पैल्सी (मस्तिष्क पक्षाघात) के 14 में से 13 मामले गर्भ में या जन्म के बाद पहले महीने के दौरान विकसित होते हैं। आमतौर पर सेरेब्रल पैल्सी को जन्मजात कहा गया है, ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी मां को गर्भधारण के साथ ही अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
विशेषज्ञाें के मुताबिक, वास्तव में गर्भावस्था के पहले दिन से लेकर अंत तक मां और बच्चा साथ बढ़ते हैं साथ सोते हैं और साथ खाते हैं। यह वह दौर है जब मां को कई तरह के तनाव और दर्द से गुजरना पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान ऐसे कई लक्षण हैं जो विकसित हो रहे शिशु के मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकते हैं और आगे चल कर मस्तिष्क पक्षाघात यानी सेरेब्रल पैल्सी का कारण बन सकते हैं।
थायरॉयड विकार, सीजर, चिकनपॉक्स, रूबेला, साइटोमेगालोवायरस जैसे संक्रमण या वायरस, मल्टीपल बर्थ, बांझपन के उपचार के लिए असिस्टिव रीप्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी जैसे कुछ प्रमुख कारण हैं जो बच्चों में सेरेब्रल पैल्सी का कारण बनते हैं।

कितने प्रकार की हाेती है सेरेब्रल पैल्सी
- इसका पहला प्रकार स्पास्टिक सेरेब्रल पैल्सी का है, जिसमें प्रमस्तिष्क पक्षाघात का सबसे आम रूप में देखा जाता है। सभी मामलों में से लगभग 70-80 फीसदी मामले इसी से प्रभावित होते हैं। सेरेब्रल पैल्सी मांसपेशियों के समूहों को प्रभावित करता है और विकार पैदा कर सकता है। स्पास्टिक सेरेब्रल की स्थिति में मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है, जो जन्म से पहले या जन्म के दौरान या बच्चे के जीवन के शुरूआती वर्षों में होती है। बच्चे के एक साल का होते-होते इसकी पहचान स्पष्ट हो जाती है क्योंकि लक्षण साफ तौर पर दिखने लगते हैं।
- दूसरा प्रकार है डिस्किनेटिक सेरेब्रल पैल्सी। इसमें में मस्तिष्क के उस हिस्से को नुकसान पहुंचता है, जिसे बेसल गैन्ग्लिया कहा जाता है। यह स्वैच्छिक गतिविधियों को विनियमित करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। मस्तिष्क के अन्य क्षेत्रों के साथ बेसल गैंग्लिया के कनेक्शन के चलते यह भावनाए मनोदशा और व्यवहार पर भी नियंत्रण करता है।

- इसका तीसरा प्रकार मिक्स्ड सेरेब्रल पैल्सी है। कई सेरेब्रल पैल्सी रोगियों में किसी एक तरह की सेरेब्रल पैल्सी के लक्षण नहीं होते हैं। इन रोगियों को मिक्सड सेरेब्रल पैल्सी से ग्रस्त माना जाता है। उनमें सामान्य से लेकर स्पास्टिक, एटेटोइड और अटैक्सिक सेरेब्रल पैल्सी के मिश्रित लक्षण दिखते हैं। मिक्सड सेरेब्रल पैल्सी, वास्तव में सेरेब्रल पैल्सी का एक प्रकार है जो तीन अन्य सेरेब्रल पैल्सी के लक्षण लिए होती है। सेरेब्रल पैल्सी वाले सभी रोगियों में लगभग दस फीसदी रोगी ऐसे होते हैं। इस प्रकार में सेरेब्रल पैल्सी के कम से कम दो रूपों का संयोजन है। मिक्सड सेरेब्रल पैल्सी मस्तिष्क को पहुंचे नुकसान के कारण होती है।
- इसके बाद अटैक्सिक सेरेब्रल पैल्सी का स्थान है। इससे पीडि़त बच्चे की गतिविधी में जकड़न या अस्थिरता होती है। ठीक से बैठ या चल नहीं पाता और झटके से महसूस होते हैं।

क्या हैं कारणगर्भावस्था के दौरान सेरेब्रल पैल्सी के लिए कई कारण हो सकते हैं। इनमें गर्भावस्था में चोट, हार्मोनल परिवर्तन, गर्भावस्था के दौरान संक्रमण, रक्त संबंधी रोग, बांझपन उपचार, जन्म के समय कम वजन, मस्तिष्क को चोट लगना, समय से पहले जन्म, ब्रेन डैमेज, जन्म में जटिलताएं शामिल हैं।

बरते ये सावधानियां
सेरेब्रल पैल्सी बचने के लिए गर्भवती महिला काे हाथ साफ रखना, प्रसव पूर्व नियमित देखभाल करना, डॉक्टर से नियमित चेकअप करवाना, खुद को फ्लू से बचाना, डॉक्टर के साथ ब्लड कम्पेटिबिलटी पर चर्चा करना, रूबेला से खुद को बचाना, जीवनशैली को नियंत्रित करना, समय पर टीकाकरण करवाना, मल्टीपल बर्थ के जोखिमों के बारे में जागरूक रहना शामिल हैं।



Unborn baby does not have cerebral palsy, do it like this - गर्भस्थ शिशु काे ना हाे सेरेब्रल पैल्सी, इस तरह से करें बचाव Unborn baby does not have cerebral palsy, do it like this - गर्भस्थ शिशु काे ना हाे सेरेब्रल पैल्सी, इस तरह से करें बचाव Reviewed by health on February 02, 2019 Rating: 5

Dhoop Mein Malish Karne Se Haddiyan Hongi Majboot - धूप में मालिश करने से हड्डियां होंगी मजबूत

February 02, 2019
Dhoop Mein Malish Karne Se Haddiyan Hongi Majboot

Dhoop Mein Malish Karne Se Haddiyan Hongi Majboot     

Dhoop Mein Malish Karne Se Haddiyan Hongi Majboot - मालिश का आयुर्वेद में विशेष महत्व है। इसे आयुर्वेद में अभ्यंग कहते हैं। अभ्यंग स्वस्थ एवं रोग, दोनों ही अवस्थाओं में उपयोगी माना गया है।

आयुर्वेद में स्नान से पहले नियमित रूप से मालिश की सलाह दी जाती है। इसके लिए ऋतु एवं रोग के अनुसार सरसों, नारियल, बादाम व जैतून तेल आदि का प्रयोग किया जाता है। सर्दियों में सरसों व नारियल तेल से मालिश करने पर रक्तसंचार में सुधार, हड्डियां व मांसपेशियां मजबूत होती हैं। धूप में बैठकर मालिश करने से विटामिन डी मिलता है, जिससे हड्डियां मजबूत व लचीली होती हैं।
मालिश के फौरन बाद न नहाकर 10 मिनट बाद स्नान करें।

सिरोभ्यंग व पांदाभ्यंग -
सिरोभ्यंग (सिर की मालिश) : इससे तनाव दूर होता है। सिर कंधों और गर्दन के दर्द में राहत और नींद अच्छी आती है। पांदाभ्यंग (पैरों की मालिश): इससे आंखों की ज्योति बढ़ती है और पैरों में मजबूत आती है। अनिद्रा, माइग्रेन, गठिया, तनाव आदि रोगों में चंदन, महाविषगर्भ और महानारायण तेल से मालिश कर सकते हैं।



Dhoop Mein Malish Karne Se Haddiyan Hongi Majboot - धूप में मालिश करने से हड्डियां होंगी मजबूत Dhoop Mein Malish Karne Se Haddiyan Hongi Majboot - धूप में मालिश करने से हड्डियां होंगी मजबूत Reviewed by health on February 02, 2019 Rating: 5

Chusti aur taakat ka khajana hai pind khajoor, Aise khaein - चुस्ती आैर ताकत का खजाना है पिंड खजूर, एेसे खाएं

February 02, 2019

Chusti aur taakat ka khajana hai pind khajoor, Aise khaein

Chusti aur taakat ka khajana hai pind khajoor, Aise khaein     

Chusti aur taakat ka khajana hai pind khajoor, Aise khaein  - सर्दियों में पिंड खजूर शरीर को तुरंत शक्ति-स्फूर्ति देता है। यह हृदय व मस्तिष्क को शक्ति देने के साथ-साथ वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को दूर करता है।इसमें कार्बोहाईड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम और फॉस्फोरस आदि प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।आइए जानते हैं पिंड खजूर के फायदे :-
- दुबले लोगों को वजन बढ़ाने के लिए खजूर के साथ दूध पीना चाहिए।

- रात के समय खजूर भिगोकर सुबह दूध या घी के साथ खाने से मस्तिष्क व हृदय की मांसपेशियों को ताकत मिलती है। रक्त की कमी से धड़कनों की अनियमितता व एकाग्रता की कमी में खजूर लाभदायी होता है।

- दमे की शिकायत है तो 2 खजूर सुबह-शाम चबाकर खाएं। इससे कफ और सर्दी दूर होती है।
- पिंड खजूर खाने से पेशाब के रोग भी दूर होते हैं। बुढ़ापे में पेशाब बार-बार आए तो दिन में दो खजूर खाने से लाभ होगा।

- बच्चा बिस्तर पर पेशाब करे तो उसे रात को छुहारे या पिंड खजूर वाला दूध पिलाने से फायदा होता है।
- भूख बढ़ाने के लिए इसका गूदा निकालकर दूध में पकाएं। ठंडा करके पीस लें। यह दूध बहुत पौष्टिक होता है। इससे भूख बढ़ती है और खाना भी पच जाता है।
- 100 ग्राम से अधिक खजूर नहीं खाने चाहिए। इससे पाचनशक्ति गड़बड़ा सकती है।



Chusti aur taakat ka khajana hai pind khajoor, Aise khaein - चुस्ती आैर ताकत का खजाना है पिंड खजूर, एेसे खाएं Chusti aur taakat ka khajana hai pind khajoor, Aise khaein - चुस्ती आैर ताकत का खजाना है पिंड खजूर, एेसे खाएं Reviewed by health on February 02, 2019 Rating: 5

Kamar Dard Mein Kargar Hai Kati Basti - कमरदर्द में कारगर है कटि बस्ति

February 02, 2019
Kamar Dard Mein Kargar Hai Kati Basti

Kamar Dard Mein Kargar Hai Kati Basti         

Kamar Dard Mein Kargar Hai Kati Basti - कमरदर्द से हम सभी कभी न कभी परेशान जरूर होते हैं। उठने-बैठने के गलत पॉश्चर से यह समस्या और भी बढ़ जाती है। ऐसे में आयुर्वेदिक कटि बस्ति उपचार से रोगी को राहत पहुंचाई जा सकती है।

प्रमुख कारण
गलत आदतें कमरदर्द का प्रमुख कारण हैं जैसे - कम्प्यूटर के आगे या ऑफिस में लगातार बैठकर काम करना, उठने-बैठने व चलने का गलत तरीका, हड्डियां कमजोर होना, शारीरिक श्रम न करना या ज्यादा करना और अत्यधिक तनाव जैसे कारणों से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है व नसों की ताकत कम हो जाती है। जब यह प्रक्रिया लगातार चलती है तो कमर के निचले हिस्से में दर्द व पैर सुन्न हो जाते हैं। कई बार दर्द एड़ी तक चला जाता है और स्थिति बिगड़ जाती है। दवाओं से जब आराम नहीं मिलता तो डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं। कमरदर्द के अधिकतर मामलों में स्लिप डिसक इसकी वजह बन जाता है। ऐसे में कटि बस्ति थैरेपी फायदेमंद होती है। साथ ही आयुर्वेदिक औषधियों, योग और नियमित व्यायाम के अभ्यास से रोगी को आराम मिलता है।

कटि बस्ति के लाभ
जड़ी-बूटियों से बने हुए गर्म तेल एवं औषधियों के गुण कमर की मांसपेशियों के सूक्ष्म ऊत्तकों में समा जाते हैं, जिससे कमर की मांसपेशियों की जकडऩ व सूजन दूर होती है। खून का दौरा बढ़ता है, मांसपेशियों, हड्डियों एवं नसों को पोषण मिलने से इनमें मजबूती आती है और तनाव दूर होकर दर्द में राहत मिलती है।

उपचार की विधि
पेट के बल लेटे रोगी की पीठ पर उड़द के आटे की बनी हुई पीठी से एक रिंग बना दी जाती है। विशेषज्ञ द्वारा इस रिंग में औषधि युक्तगर्म तेल सहने लायक स्थिति में धीर-धीरे डाला जाता है। एक सिटिंग 40-45 मिनट की होती है व जरूरत के अनुसार 5-7 या ज्यादा सिटिंग विशेषज्ञ की राय से दी जाती हैं।



Kamar Dard Mein Kargar Hai Kati Basti - कमरदर्द में कारगर है कटि बस्ति Kamar Dard Mein Kargar Hai Kati Basti - कमरदर्द में कारगर है कटि बस्ति Reviewed by health on February 02, 2019 Rating: 5

Khana Khane Ke Turant Baad Letne Se Hoti Hai Ye Gambhir Samassiya - खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से होती है ये गंभीर समस्या

February 02, 2019

Khana Khane Ke Turant Baad Letne Se Hoti Hai Ye Gambhir Samassiya

Khana Khane Ke Turant Baad Letne Se Hoti Hai Ye Gambhir Samassiya            

Khana Khane Ke Turant Baad Letne Se Hoti Hai Ye Gambhir Samassiya - जब हमारे पेट में सामान्य से ज्यादा एसिड बनने लगे तो उसे 'एसिड रिफ्लेक्स' कहते हैं। इस दौरान एसिड, फूड पाइप से होता हुआ गले तक आ जाता है और समस्या गंभीर होने पर खट्टी डकारें भी आने लगती हैं। परेशानी लंबे समय तक बनी रहने पर मरीज को खांसी और अस्थमा की तकलीफ भी हो सकती है।

प्रमुख कारण : खाली पेट रहना, जरूरत से ज्यादा खाना, असमय भोजन करना, जंकफूड, रात का भोजन भारी लेना, खाते ही लेट जाना, धूम्रपान व शराब का सेवन, मोटापा और गरिष्ठ भोजन करने से एसिड रिफ्लेक्स की समस्या हो सकती है।

लक्षण : सीने के मध्य जलन और दर्द होना, पेट फूलना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, जी घबराना, कभी-कभी सीने में दर्द होना, चक्कर आना और कई बार तो मरीज को दर्द के कारण ऐसा लगता है कि उसे हार्ट अटैक आने वाला है, लेकिन जांच से पता चलता है कि एसिड रिफ्लेक्स की समस्या है।

इलाज : इस रोग में डॉक्टर मरीज को दवाओं के साथ-साथ खानपान और दिनचर्या सुधारने के लिए कहते हैं। इसमें रोगी को पनीर, छोले, चना, राजमा, अचार, गर्म-मसाले, फास्टफूड, डेयरी प्रोडक्ट जैसी बादी करने वाली चीजों से परहेज व वजन पर नियंत्रण रखना चाहिए। अल्कोहल, सिगरेट और तंबाकू आदि का सेवन न करें। चाय या कॉफी से एसिडिटी की समस्या हो तो इनकी मात्रा कम ही लें।



Khana Khane Ke Turant Baad Letne Se Hoti Hai Ye Gambhir Samassiya - खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से होती है ये गंभीर समस्या Khana Khane Ke Turant Baad Letne Se Hoti Hai Ye Gambhir Samassiya - खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से होती है ये गंभीर समस्या Reviewed by health on February 02, 2019 Rating: 5

Reverse-upset by eating babies, problem of obesity, avoidance. - उल्टा-सीधा खाने से बच्चाें में हाेती है मोटापे की समस्या, एेसें करें बचाव

February 02, 2019
Reverse-upset by eating babies, problem of obesity, avoidance

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Reverse-upset by eating babies, problem of obesity, avoidance - अमरीकी शोधकर्ताओं का कहना है कि 6-12 माह के बच्चों को हम कई बार प्यार से उल्टा-सीधा खिला देते हैं, जिससे उनका बॉडी मास इंडेक्स बढ़ जाता है।

दुलार में कैंडी, आइसक्रीम, बर्गर, पिज्जा आदि खिलाने से बच्चों को ऐसे ही खाने की आदत पड़ जाती है, जिससे उनका मोटापा बढ़ता है। इसलिए बच्चों को शुरू से ही फल और सब्जियां खिलाएं ताकि उनका अनावश्यक वजन न बढ़े व खेलकूद के लिए एनर्जी भी बनी रहे। ध्यान रहे कि बच्चों की डाइट में वैरायटी हो क्योंकि एक ही तरह का खाना खाते-खाते वे ऊब जाते हैं।

करें ये उपाय -
- बच्चाें काे फास्टफूड की जगह घर में बने दलिया, चना, पाेहे जैसी चीजाें का नाश्ता दें। प्राेटन से भरपूर यह नाश्ता उनके दिमागी आैर शारीरीक विकास के लिए जरूरी है।
- हरे पत्तेदार सब्जियां, माैसमी फल, ड्राई फ्रूट, दूध काे डाइट में शामिल करें।
- खाने काे पचाने के लिए शारीरीक गतिविधि जरूर करें। सुबह शाम बच्चाें काे खेलने के लिए समय दें इससे उनका शरीर मजबूत बनेगा।



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Sardi Mein Subah Ke Samay Hone Walie Rog Se Bachein - सर्दी में सुबह के समय होने वाले रोगों से बचें

February 02, 2019
Sardi Mein Subah Ke Samay Hone Walie Rog Se Bachein

Sardi Mein Subah Ke Samay Hone Walie Rog Se Bachein     


Sardi Mein Subah Ke Samay Hone Walie Rog Se Bachein - गले में सूजन व दर्द -

सर्दियों में अक्सर सुबह उठने पर गले में हल्का दर्द और सूजन की शिकायत होती है। इसका कारण कमरे में ड्राई एयर होना है। कभी-कभी नाक बंद होने की वजह से हम मुंह से सांस लेने लगते हैं, जिससे गला सूख जाता है। कोशिश करें कि कमरे को ज्यादा गर्म न रखें ताकि उसमें उचित नमी रहे। इसके अलावा भाप लेने से भी समस्या दूर हो सकती है। रात को सोते समय बिस्तर के पास ही पानी रखें और गला सूखने पर पिएं।

जोड़ों के दर्द की समस्या -
गठिया का दर्द अक्सर देर रात या तड़के में ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस समय जॉइंट ठंडे हो जाते हैं। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं क्योंकि कम पानी पीने की वजह से खून में यूरिक एसिड बढ़ जाता है और दर्द होने लगता है।

जब हो जाए सिरदर्द -
माइग्रेन व सिरदर्द अक्सर सुबह ही शुरू होता है। नींद से अचानक जगने की वजह से सुबह 4 बजे से लेकर 8 बजे के बीच यह दर्द ज्यादा हो जाता है क्योंकि शरीर में नैचुरल पेनकिलर एंड्रोफिंस व एनकाफालिंस सुबह में अपने निचले स्तर पर होते हैं। सोने से पहले कॉफी पीकर इस दर्द को कम किया जा सकता है।



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