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Jab Aankhon Ko Nuksan Pahunchati Hai Diabetes - जब आंखों को नुकसान पहुंचाती है डायबिटीज

January 31, 2019
डायबिटिक रैटिनोपैथी के मरीजों में शरीर के अन्य अंगों के साथ-साथ आंख के पर्दे की रक्त कोशिकाओं पर भी असर पड़ता है। आंखों का यह रोग होने की आशंका उस समय और भी बढ़ जाती है, जब मरीज की डायबिटीज के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर, लंबे समय से डायबिटीज, रक्त में शुगर की मात्रा नियंत्रण में न रहे या उसे कम उम्र में शुरू होने वाला डायबिटीज (इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज) हो। इस वजह से पर्दे में सूजन, रक्त का रिसाव, पर्दे पर खिंचाव आदि हो सकता है। हालांकि शुरुआत में इन कारणों से आंखों की रोशनी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता, लेकिन धीरे-धीरे डायबिटीज बढ़ने से रोशनी प्रभावित होने लगती है और आगे चलकर यह लाइलाज हो जाती है।
इलाज -
इसके मरीज साल में दो बार पुतली फैलाने की दवा डालकर फंडोस्कोपी कराएं। खून की नसों में होने वाले परिवर्तनों का पता लगाने के लिए एंजियोग्राफी व ओसीटी कराएं। आंख में खून भरने या खिंचाव से पर्दा फटने पर सर्जरी ही एकमात्र उपाय है। इसके अलावा अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें।



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Kiya Apko Bhi Bewajah Jagne Ki Aadat Hai - क्या आपको भी बेवजह जागने की आदत है ?

January 31, 2019
Kiya Apko Bhi Bewajah Jagne Ki Aadat Hai

Kiya Apko Bhi Bewajah Jagne Ki Aadat Hai             


Kiya Apko Bhi Bewajah Jagne Ki Aadat Hai  - नींद आपके नए दिन और काम के लिए कितनी जरूरी है, यह जानते हुए भी आप नींद उड़ाते हैं। आप ऐसा क्यों करते हैं, नीचे दिए सवालों के जवाब देकर खुद ही परख लीजिए।
1. मुझे लगता है कि मैं जितना चाहूं, जब चाहूं जाग और सो सकता/सकती हूं।
अ: सहमत
ब: असहमत
2. मैं जोश और किसी के उकसावे में आकर ऐसा कर जाता/जाती हूं,लेकिन बाद में भारी पड़ता है।
अ: सहमत
ब: असहमत
3. काम के तनाव और दबाव के सामने मेरे लिए नींद ज्यादा मायने नहीं रखती।
अ: सहमत
ब: असहमत
4. मैं जब तक पूरी तरह से थक न जाऊं, मैं ठीक से सो ही नहीं सकती/सकता।
अ: सहमत
ब: असहमत
5.मेरी नींद ही ऐसी है कि क्या करूं, हमेशा उड़ी-उड़ी ही रहती है।
अ: सहमत
ब: असहमत
6. मेरे लिए नींद से ज्यादा जरूरी पैसा कमाना और परिवार की खुशियां है, इसलिए जागना पड़ता है।
अ: सहमत
ब: असहमत
7. मैं वीकएंड में जमकर सोता/सोती हूं और पूरे सप्ताह की भरपाई अपने आप हो जाती है।
अ: सहमत
ब: असहमत
8. हां, मुझे लगता है कि मेरी नींद कम हो रही है, लेकिन यह उम्र का असर लगता है।
अ: सहमत
ब: असहमत
9. मुझे पता है नींद से एक नया जीवन मिलता है, यकीनन मुझे अपनी आदतों में सुधार करना चाहिए।
अ: सहमत
ब: असहमत
स्कोर और एनालिसिस -
आप अपना 'सोना' लुटा रहे हैं : यदि आप क्विज के 7 या उससे ज्यादा सवालों से सहमत हैं तो ऐसा लगता है कि आपको जानबूझकर खुद को अशांत करना अच्छा लगने लगा है। नींद के मामले में ये अच्छे संकेत नहीं हैं। सबसे पहले अपनी सोच को सुधारिए और फिर अनुशासित तरीके से आदतों पर काबू पाइए।
आपको 'सोना' सुकून देता है : यदि क्विज के 7 या उससेे ज्यादा सवालों से असहमत हैं तो आप तारीफ के लायक दिनचर्या का पालन करने वाले व्यक्ति हैं। आप नींद में कटौती केवल तभी करते हैं, जबकि ऐसा करना किसी इमरजेंसी के कारण जरूरी होता है। नींद के कारण आपकी गतिविधियां और कार्य भी अनुशासित तरीके से समय पर शुरू और पूरे होते हैं। अपनी अच्छी आदत को बनाए रखें।



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Masudo ki takleef ke lie in khaas ilaajon ke baare mein jaanen/मसूड़ों की तकलीफ के लिए इन खास इलाजों के बारे में जानें

January 03, 2019
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मसूड़ों की तकलीफ के लिए इन खास इलाजों के बारे में जानें


मसूड़ों से खून निकलना आम समस्या है और कई लोगों को यह परेशानी अपनी चपेट में ले लेती है। यह रोग किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है इसलिए मसूड़ों की सूजन का शुरुआती अवस्था में ही उपचार करा लेना चाहिए। आइये जानते हैं मसूड़ों की तकलीफ के लिए उपचार के बारे में
कारण : दांतों और मसूड़ों पर गंदगी जमा होने से सूजन आ जाती है इससे मरीज के मसूड़ों को थोड़ा सा छूने या ब्रश करने पर खून आने लगता है। कई बार तो लोग इस चक्कर में ब्रश करना ही छोड़ देते हैं।
होम्योपैथिक औषधियां : इस पद्धति में इलाज के लिए मेर्कसोल, क्रेओसोतुम, प्लातांगो, चिनोपोडियम,फ्रिगारिया, कैल्कारे-फ्लोर, कोफिया-क्रुदा, एसिड-फ्लोर, हेक्ला लावा, रातान्हिया, कोफिया टोस्ता आदि का प्रयोग किया जाता है।
(दवाओं का प्रयोग डॉक्टरी सलाह से करें)
घरेलू उपाय -
मसूड़ों में सूजन होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूंदें पानी में मिलाकर कुल्ला करें
नीम की दातुन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं
दांतदर्द में तिल को पानी में चार घंटे भिगो दें फिर छानकर उसी पानी को मुंह में भरें और 10 मिनट बाद उगल दें। 4-5 बार ऐसा करें। इससे मुंह के घाव, दांतों में सडऩ, संक्रमण और पायरिया से मुक्ति मिलती है।
नीम के फूलों का काढ़ा बनाकर पीने से मसूड़ों से गंध नहीं आती।


Masudo ki takleef ke lie in khaas ilaajon ke baare mein jaanen/मसूड़ों की तकलीफ के लिए इन खास इलाजों के बारे में जानें Masudo ki takleef ke lie in khaas ilaajon ke baare mein jaanen/मसूड़ों की तकलीफ के लिए इन खास इलाजों के बारे में जानें Reviewed by health on January 03, 2019 Rating: 5

बच्चों की ब्रेन पावर बढ़ाने के लिए जरूरी हैं ये उपाय(These measures are necessary to increase the brain power of children.)

December 31, 2018
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अगर आप अपने बच्चे की ब्रेन पावर बढ़ाना चाहते हैं तो उसके खानपान और घरेलू माहौल पर विशेष ध्यान दें। इन बातों का बच्चे के मस्तिष्क पर गहरा असर पड़ता है और स्कूल में उसकी परफोर्मेंस प्रभावित होती है।
ऐसा हो खानपान -
'ब्रेन बायो सेंटर' के न्यूट्रिशनल थैरेपिस्ट डेबोरा कॉल्सन के मुताबिक बच्चों को नाश्ते में पुडिंग, आटे से बनी ब्रेड, लापसी, राबड़ी आदि दे सकते हैं। ऐसे पदार्थ दिमाग को एनर्जी देते हैं। बच्चे को कोल्ड ड्रिंक, कॉफी या बर्फ का गोला आदि ना दें। इनसे उनकी नींद पर बुरा असर पड़ता है और एकाग्रता भी भंग होती है। इनकी बजाय फल, सब्जियां, दाल, सूखे मेवे, मूंगफली, चना, लोबिया, दालें आदि खिलाएं। माता-पिता इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि बच्चा पर्याप्त मात्रा में पानी पीए क्योंकि पानी की कमी से दिमाग पर असर पड़ता है।
माता-पिता का व्यवहार -
माता-पिता द्वारा अपने बच्चे के साथ किया गया व्यवहार व कई ऐसी गतिविधियां हैं, जो उसकी ब्रेन पावर पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। जैसे बच्चे के साथ पढ़ना, उसे कविताएं गाकर सुनाना फिर उसे सुनाने को कहना, पेंटिंग, ड्रॉइंग आदि के लिए प्रेरित करना, अक्षरों व संख्याओं वाले खिलौनों से खिलाना, बच्चे को घुमाने ले जाना और उसे मित्र बनाने के लिए प्रेरित करना।
घरेलू माहौल -
पेरेन्टिंग एक्सपर्ट एलिजाबेथ हर्टले ब्रीवर का कहना है कि जब माता-पिता बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताते हैं और उनकी गतिविधियों में दिलचस्पी दिखाते हैं तो बच्चे का आत्मसम्मान बढ़ता है। ऐसे बच्चों में सेल्फ कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है जिससे वे खुश रहते हैं और स्कूल में उनका प्रदर्शन बढ़िया रहता है।
बच्चों पर करें भरोसा -
इन सबके अलावा बच्चों पर भरोसा करें। उन्हें अच्छा काम करने के लिए शाबासी दें या घर की रफ कॉपी में बढ़िया काम करने पर गुड या एक्सीलेंट से उनका उत्साह बढ़ाएं।

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जानिए शाम को कितने बजे के बाद सोना सेहत के लिए है हानिकारक(Janie sham ko kitane baje ke baad sona sehat ke lie hai haanikarak.)

December 31, 2018
Janie sham ko kitane baje ke baad sona sehat ke lie hai haanikarak.

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अमरीकन जर्नल ऑफ फिजियोलोजी में स्लीप डिसऑर्डर्स सेंटर्स (अरीजोना) के निदेशक डॉ. रॉबर्ट रोजेनबर्ग ने एक ताजा अध्ययन में नींद से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातों का खुलासा किया है। डॉ. रॉबर्ट ने शाम 4 बजे के बाद झपकी न लेने की सलाह दी है क्योंकि इससे रात की नींद में खलल पड़ता है।
हार्मोन में बदलाव : दोपहर दो से चार बजे के बीच हमारा एनर्जी लेवल तेजी से गिरता है क्योंकि इस वक्त कोर्टिसोल और मेलाटोनिन हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। इससे बचने के लिए दोपहर एक बजे के आसपास झपकी लेना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहता है।
नींद का आदर्श समय : 20 मिनट की झपकी हमारी एकाग्रता और ऊर्जा स्तर को बढ़ाने में काफी मददगार हो सकती है। दिमाग ठीक ढंग से काम करे इसके लिए नींद का आदर्श समय तो 7-8 घंटे का है लेकिन अगर आप इतनी नींद नहीं भी ले पाते तो कम से कम साढ़े पांच घंटे तो जरूर सोएं।
टिप्स : अच्छी नींद के लिए जरूरी है कि आप समय पर सोने व जागने का नियम बनाएं। देर रात तक लैपटॉप, टीवी या मोबाइल का प्रयोग करने से बचें।

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संगीत चिकित्सा से रोगी के इलाज में आती है तेजी(Sangeet chikitsa se rogee ke ilaaj mein atee hai tejee.)

December 31, 2018
Sangeet chikitsa se rogee ke ilaaj mein atee hai tejee.

Sangeet chikitsa se rogee ke ilaaj mein atee hai tejee

संगीत शारीरिक और मानसिक रोगों का उपचार करने में सक्षम है। यह शरीर के समस्त तंत्रों पर अपना प्रभाव डालता है। मानसिक व तंत्र रोगों पर तो यह विशेष रूप से अधिक प्रभावी सिद्ध हुआ है।
संगीत चिकित्सा किसी भी अन्य चिकित्सा पद्धति के साथ प्रयोग करने पर यह अपने मानसिक प्रभाव के कारण रोगी के स्वस्थ होने की दर को बढ़ा देती है। संगीत चिकित्सा की यह एक विशेषता है कि यह शरीर के सारे अंगों और समस्त शारीरिक कार्यप्रणाली पर उत्तेजना व शिथिलन दोनों तरह से प्रभाव डालती है। संगीत का यह प्रभाव रोग एवं संगीत की प्रकृति पर निर्भर करता है। आइये जानते हैं कि कौन सा राग किस रोग के इलाज के लिए उपयोगी होता है।
उपयोगी राग -
राग : ललित, केदार। मानसिक रोगों में उपयोगी।
राग : यमन, कल्याण, नट भैरव, हिन्डौल, जोनपुरी। हड्डियों के लिए फायदेमंद।
राग : भैरवी, केदार, श्री शुद्ध कल्याण। अस्थमा में उपयोगी।
राग : हिण्डौल, पूरिया, कौशिक कानडा, तोडी, पूर्वी, मुल्तानी। लो व हाई ब्लड प्रेशर में लाभकारी।

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दिल और दिमाग को दुरुस्त रखता है अखरोट, जानें इसके फायदे(Dil aur dimaag ko durust rakhta hai akhrot, janen isake faiyde)

December 31, 2018
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Dil aur dimaag ko durust rakhta hai akhrot, janen isake faiyde


कुदरत ने कठोर आवरण में सुरक्षित करके अखरोट में इतने गुण भर दिए हैं कि इसे खाने से सेहत को कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ होते हैं। शाकाहारी लोगों के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड प्राप्त करने का यह कुदरती उपाय है। यह दिमाग और दिल के लिए भी अच्छा होता है। संभव हो तो आप भी अपनी डाइट में अखरोट को शामिल करें। आइये जानते हैं अखरोट से होने वाले फायदों के बारे में।
फाइबर: अखरोट फाइबर का बढिय़ा स्रोत है। जिससे कब्ज की समस्या नहीं रहती और पाचन प्रक्रिया दुरुस्त होती है।
अनिद्रा: इसमें अच्छी नींद दिलाने वाला हार्मोन मेलाटोनिन होता है। इसमें मौजूद विटामिन ई बालों के लिए काफी फायदेमंद होता है। ये बालों को मजबूत करके टूटने को बचाता है।
ध्यान रखें ये बातें -
डाइटीशियन के अनुसार एक दिन में 10-15 अखरोट खा सकते हैं। इन्हें एक साथ खाने की बजाय नाश्ते व शाम को स्नैक्स में थोड़ा-थोड़ा लें। कुछ लोग इसे बादाम की तरह भिगोकर खाते हैं लेकिन इसके छिलके को हटा देने से उसमें मौजूद कई पोषक तत्व हमें नहीं मिल पाते।

दिल और दिमाग को दुरुस्त रखता है अखरोट, जानें इसके फायदे(Dil aur dimaag ko durust rakhta hai akhrot, janen isake faiyde) दिल और दिमाग को दुरुस्त रखता है अखरोट, जानें इसके फायदे(Dil aur dimaag ko durust rakhta hai akhrot, janen isake faiyde) Reviewed by health on December 31, 2018 Rating: 5

एसिड से टॉयलेट की सफाई से हो सकता है सेहत को नुकसान(Acid se toilet kee safaee se ho sakata hai sehat ko nukasaan)

December 31, 2018


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अक्सर टॉयलेट को साफ करने के लिए लोग एसिड जैसे उत्पाद इस्तेमाल करते हैं जबकि विशषेज्ञ एसिड के इस्तेमाल को सेहत के लिए हानिकारक व असुरक्षित मानते हैं। आइये जानते हैं एसिड से टॉयलेट साफ करने से होने वाले नुकसान के बारे में...
हो सकता है अस्थमा -
भारत में टॉयलेट साफ करने के लिए एसिड का इस्तेमाल करना बहुत ही आम है। बहुत से लोगों को ये पता ही नहीं है कि एसिड से निकलने वाले धुएं व तेज दुर्गंध से सांस से जुड़ी समस्याएं जैसे कि अस्थमा आदि हो सकता है। अगर इसका इस्तेमाल लंबे समय तक किया जाता है तो इससे शरीर के दूसरे भाग जैसे कि किडनी व लिवर पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
शरीर में जाते हैं रसायन -
आमतौर पर जो घटक एसिड में प्रयोग किए जाते हैं उनमें सोडियम बाइसल्फेट, ऑक्सेलिक एसिड, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और सल्फ्यूरिक एसिड शामिल होते हैं। ये रसायन हमारे शरीर में न सिर्फ धुएं के माध्यम से जाते हैं बल्कि त्वचा के माध्यम से भी अवशोषित हो जाते हैं।
दिशा-निर्देश नहीं -
कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने खुले में एसिड बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन इसके बावजूद एसिड को टॉयलेट क्लीनर के नाम पर बेचा जा रहा है क्योंकि देश में साफ -सफाई के उत्पाद बनाने वाले घटकों के प्रयोग पर उचित दिशा निर्देश नहीं है।
ये हैं उपाय -
ऐसे टॉयलेट क्लीनर का प्रयोग करें जिनमें निर्धारित मात्रा में रसायन हों। नियमित टॉयलेट की सफाई करेंगे तो आपको ऐसे कैमिकल्स की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। अगर आवश्यकता पड़े भी तो वॉशिंग पाउडर या लिक्विड डिटर्जेंट का प्रयोग किया जा सकता है।


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त्वचा को चमकदार और खूबसूरत बनाएगी मसूर की दाल, एेसे करें उपयोग(Twacha ko chamakadaar aur khoobasoorat banaegee masoor kee daal,aise karen upayog)

December 31, 2018
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मसूर की दाल में कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, मैग्नीशियम, सल्फर, कॉपर व जिंक जैसे कई पोषक तत्व होते हैं। आइये जानते हैं इसके मसूर की दाल के औषधीय गुणों के बारे में।
मसूर की दाल को जलाकर उसकी भस्म बनाकर दांतों पर रगड़ने से दांत से संबंधित कई रोग दूर होते हैं।
मसूर की दाल का फेस पैक को लगाने से त्वचा युवा, कोमल और चमकदार बनती है। मसूर दाल त्वचा पर अतिरिक्त तेल भी कम करती है। इससे कील-मुँहासे कम होते हैं। मसूर की दाल का पेस्ट त्वचा की लकीरों, झुर्रियों और काले धब्बों कम कर देता है। मसूर की दाल के आटे में घी व दूध मिलाकर चेहरे पर लेप करने से झाइयां खत्म होती हैं।
इसकी दाल का सूप बनाकर पीने से आंतों से संबंधित रोगों में लाभ होता है। मसूर की भस्म बनाकर उसमें भैंस का दूध मिलाकर घाव पर लगाने से घाव जल्दी भरता है।
मसूर दाल रक्त में कोलेस्ट्रॉल को कम करती है क्योंकि इसमें घुलनशील फाइबर का ज्यादा मात्रा में होता है। मसूर दाल पाचन में सुधार लाने में मदद करती है ।


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इन सवालों के जवाब से जानिए आप आलसी हैं या लापरवाह ?(In sawalon ke jawab se jaanie aap aalsee hai ya laaparawah ?)

December 31, 2018

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कुछ चीजें हम चाहकर भी हासिल नहीं कर पाते। इसके पीछे लापरवाही या आलस होता है। नीचे दिए सवालों के जवाब से सहमत या असहमत होकर खुद को परख लें।
1. इतनी उलझन है कि समझ ही नहीं पाता/पाती हूं कि लापरवाही कहां हो गई।
अ: सहमत
ब: असहमत
2. मेरे लिए किसी काम में लापरवाही करने या हो जाने में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है।
अ: सहमत
ब: असहमत
3. मैं अपनी तरफ से पूरा दम लगा देता/देती हूं लेकिन सब कुछ अपने हाथ में नहीं होता।
अ: सहमत
ब: असहमत
4. मैं सेहत के मामले में अपनी मान्यताओं पर भरोसा करता/करती हूं, उसे लापरवाही कहना ठीक नहीं।
अ: सहमत
ब: असहमत
5. जिम्मेदारियों के बीच सेहत के लिए समय बहुत कम बचता है, मैं इसे लापरवाही नहीं मानता/मानती।
अ: सहमत
ब: असहमत
6. मुझे पता है कि मेरी सेहत के लिए क्या सही है लेकिन कुछ करने का मन नहीं होता।
अ: सहमत
ब: असहमत
7. मैं छोटी कोशिशें करता/करती हूं लेकिन सफलता न मिलने पर निराशा होती है।
अ: सहमत
ब: असहमत
8. मेरी ओर से सुधार की पूरी कोशिश होती है लेकिन आखिर में आकर भटक जाता/जाती हूं।
अ: सहमत
ब: असहमत
9. मुझे लगता है सेहत को ठीक रखने के लिए मुझे और पढऩे व सीखने की जरूरत है।
अ: सहमत
ब: असहमत
स्कोर और एनालिसिस -
आपकी लापरवाही 'जोखिमभरी है' : आप 7 या उससे ज्यादा सवालों से सहमत हैं तो समझ आता है कि लापरवाही के कारण आपकी सेहत की समस्याएं उभर रही हैं। आपको आज और अभी से जागना होगा। लापरवाही का मुकाबला आत्म नियंत्रण और समय का सही प्रबंधन करके कीजिए। सेहत में समय, सजगता और संतुलन से निवेश कीजिए क्योंकि सेहत साथ होगी तो सब साथ होंगे।
आप लापरवाही से सबक लेते है : यदि आप 7 या उससे ज्यादा सवालों से असहमत हैं तो लगता है कि आप लापरवाहियों को कभी हल्के ढंग से नहीं लेते। आप योजना बनाकर अनुशासित कदम उठाने में सक्षम हैं इसीलिए लापरवाहियों से बचते हैं। अपनी सजगता को और बढ़ाइए, साथ ही दूसरों के साथ बांटिए भी।


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जानिए डायबिटीज के लिए ये खास घरेलू नुस्खे(Jaanie DIABETIES ke lie ye khaas gharelu nuskhe)

December 31, 2018

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Jaanie DIABETIES  ke lie ye khaas gharelu nuskhe


मधुमेह य डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें अगर ब्लड शुगर का लेवल लगातार बढ़ा हुआ रहे तो शरीर के कई अंगों जैसे हृदय, लिवर, नाड़ी तंत्र और आंखों आदि पर बुरा असर पड़ता है, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। अगर डॉक्टर की देखरेख में रहते हुए संतुलित खानपान और नियमित दिनचर्या अपनाई जाए तो इस समस्या में राहत मिल सकती है। आयुर्वेद के अनुसार करेला, नीम, दानामेथी और जामुन आदि को आहार में शामिल कर आप डायबिटीज की समस्या को कंट्रोल कर सकते हैं। आइये जानते है डायबिटीज के इलाज लिए कुछ खास घरेलू नुस्खे...
करेला : इसे जूस, चूर्ण या सब्जी के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। करेले के जूस की 100-125 मिलिलीटर की मात्रा को खाली पेट लेने से लाभ होता है। इसे आप आंवले के जूस के साथ भी ले सकते हैं। करेले को काटकर धूप में सुखाकर तैयार किया गया चूर्ण 2-3 ग्राम की मात्रा में भूखे पेट सुबह-शाम लेने से भी फायदा होता है।
जामुन : जामुन खाएं या जामुन की गुठली की गिरी का चूर्ण बनाकर 2-3 ग्राम सुबह शाम खाने से पहले पानी से लें।
दानामेथी : 1-2 चम्मच दानामेथी रात में एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट इस पानी को पी लें और भिगोई हुई दाना मेथी की सब्जी बना लें या कच्ची ही खा सकते हैं।
नीम : नीम की कच्ची कोंपल या नीम की पत्तियों का चूर्ण पानी से लेना बढ़े हुए शुगर लेवल को कम करता है।
गेहूं, जौ व चने का आटा मिलाकर खाना, प्याज व लहसुन का सेवन डायबिटीज में फायदेमंद है। ऊपर बताई गई चीजें एक साथ ना लेकर बदल-बदल कर खानपान में शामिल करना चाहिए और समय-समय पर ब्लड शुगर लेवल भी चेक कराना चाहिए ताकि शुगर लेवल सामान्य से कम ना हो। जो भी चीजें आप अपनी डाइट में शामिल करने वाले हों, उनके बारे में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।


जानिए डायबिटीज के लिए ये खास घरेलू नुस्खे(Jaanie DIABETIES ke lie ye khaas gharelu nuskhe) जानिए डायबिटीज के लिए ये खास घरेलू नुस्खे(Jaanie DIABETIES  ke lie ye khaas gharelu nuskhe) Reviewed by health on December 31, 2018 Rating: 5

Gharelu nuskhe - सर्दियों में ये इन 3 टिप्स आजमाएं, चमकदार मुलायम त्वचा पाएं(Sardiyon me ye in 3 tips ajamaen, chamakadaar mulayam twacha paen)

December 30, 2018
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सर्दियों में शुष्क हवाअाें की वजह से त्वचा रुखी हो जाती है, जिससे आपकी खूबसूरती कहीं खो जाती है। ऐसे में आप कुछ घरेलू नुस्खे अपनाकर अपनी त्वचा का रूखापन दूर उसे चमकदार अाैर मुलायम बना सकती हैं। जानिए क्या हैं वे नुस्खे-
दही का प्रयोग
ड्राई स्किन हो तो आप दही का इस्तेमाल कर त्वचा की शुष्की को दूर कर सकते हैं। त्वचा पर ब्लीचिंग की जरूरत हो तो चेहरे पर दही लगा सकते हैं यानी घरेलू नुस्खों में दही त्वचा की रंगत निखारने में बहुत लाभदायक है।
घर पर बनाएं स्क्रब
सर्दियों में त्वचा में ग्लो लाने के लिए एक चम्मच मसूर की दाल, एक चम्मच जौ का आटा, एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी, एक चुटकी हल्दी और दो बूंद शहद को कच्चे दूध में मिलाकर स्क्रब तैयार कर लें। इस स्क्रब को सुबह व शाम चेहरे पर पांच मिनट तक हल्के हाथों से मलें और छोड़ दें। दस मिनट बाद साफ पानी से चेहरा धो लें। ऐसा करने से स्किन में धीरे-धीरे ग्लो आने लगेगा और रंग भी निखरेगा।
नींबू व दही का प्रयोग
त्वचा को तरोताजा बनाने के लिए आप नींबू का रस दही में मिलाकर चेहरे पर लगाएं और फिर कुछ दिनों में ही आप चेहरे पर बदलाव पाएंगे। दही त्वचा पर मॉइश्चराइजर का काम करता है यानी त्वचा की नमी लौटाता है और त्वचा को मुलायम बनाता है। दरअसल, दही में मौजूद लेक्टिक एसिड त्वचा पर फेशियल मास्क की तरह कार्य करता है और त्वचा के भीतरी छिपी गंदगी को बाहर करता है।


Gharelu nuskhe - सर्दियों में ये इन 3 टिप्स आजमाएं, चमकदार मुलायम त्वचा पाएं(Sardiyon me ye in 3 tips ajamaen, chamakadaar mulayam twacha paen) Gharelu nuskhe - सर्दियों में ये इन 3 टिप्स आजमाएं, चमकदार मुलायम त्वचा पाएं(Sardiyon me ye in 3 tips ajamaen, chamakadaar mulayam twacha paen) Reviewed by health on December 30, 2018 Rating: 5

एेसे करें कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल(Aise karen cholesterol level ko cantrol)

December 30, 2018
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शरीर में कोशिकाओं के कार्यकलाप और उनकी मरम्मत, एस्ट्रोजन व टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के निर्माण के लिए कोलेस्ट्रॉल काफी जरूरी होता है। इसकी अधिकता से हृदय संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन खानपान के तौर तरीकों में बदलाव और नियमित व्यायाम से इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है।
यह है कोलेस्ट्रॉल -
फिजिशियन अनुसार कोलेस्ट्रॉल शरीर में मौजूद एक पदार्थ है जो हमारे रक्त और कोशिकाओं में मौजूद होता है। यह शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक होता है लेकिन इसकी अधिकता खतनाक हो सकती हैै। कोलेस्ट्रॉल का पता लगाने के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट सुबह के समय खाली पेट किया जाता है। तली-भुनी चीजें व जंकफूड ज्यादा खाने, व्यायाम ना करने और अनुवांशिकीय कारणों की वजह से कोलेस्ट्रॉल की समस्या होती है।
कोलेस्ट्रॉल लेवल (मिलिग्राम पर्सेंट)
सामान्य : 130-250
आदर्श : 200 से कम
एचडीएल : 45 से ज्यादा
एलडीएल : 130 से कम
तीन प्रकार का होता है
यह तीन प्रकार का होता है। एचडीएल, एलडीएल और वीएलडीएल।
एचडीएल : यह बढ़िया कोलेेस्ट्रॉल होता है जो दिल की धमनियों में वसा को जमने नहीं देता।
एलडीएल व वीएलडीएल दोनों हृदय के लिए खराब होते हैं। इनमें एलडीएल दिल को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
व्यायाम से बनें फिट
चलते रहें : जितना पैदल चलेंगे, उतने ही फिट रहेंगे और इससे कोलेस्ट्रॉल भी कंट्रोल में रहेगा। रोजाना कम से कम 45 मिनट की वॉक जरूर करें।
कसरत से हो दिन की शुरुआत : अपनी लाइफ में रोजाना आधे घंटे की एक्सरसाइज को जरूर शामिल करें। इससे न सिर्फ वजन कंट्रोल में रहेगा बल्कि कोलेस्ट्रॉल लेवल भी खतरे के निशान तक नहीं पहुंचेगा। इसके लिए आप साइकिल चलाएं, स्वीमिंग करें या योग का सहारा भी ले सकते हैं।
खानपान : अपनी डाइट में हरी सब्जियां जैसे पालक, मटर, हरा प्याज आदि शामिल करें। फाइबर फूड जैसे पत्तागोभी, मशरूम और सूखे मेवे अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ाते हैं। मौसमी फल जरूर खाएं। सलाद को भी आहार का हिस्सा जरूर बनाएं।
ध्यान रहे : दिल की सेहत के लिए महीनों, सालों तक सिर्फ एक ही प्रकार के कुकिंग ऑयल में खाना बनाने की बजाय अलग-अलग तेल का प्रयोग करें। इसके लिए सरसों या अलसी का तेल और गाय के घी का प्रयोग किया जा सकता है।


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कब्ज और खून की कमी के लिए लाभदायक है खजूर, जानें इसके अन्य फायदे(Kabz aur khoon ki kamee ke lie laabhadaayak hai khajoor, jaanen iske kai fayade)

December 30, 2018
Kabz aur khoon ki kamee ke lie laabhadaayak hai khajoor, jaanen iske kai fayade

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खजूर सस्ता व कई खूबियों से भरपूर होता है। इसे रोजाना खाने से कई रोगों में लाभ होता है। आइये जानते हैं खजूर से होने वाले फायदों के बारे में।
एनर्जी : खजूर कुदरती शर्करा का भंडार है जो एनर्जी देता है। इसमें कैलोरी भी नाममात्र की होती है इसलिए यह सेहत के लिए फायदेमंद है। बढ़ते बच्चों के लिए खजूर खाना काफी फायदेमंद होता है क्योंकि उन्हें ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है।
आयरन : रोजाना खजूर खाने से एनीमिया की समस्या में लाभ होता है क्योंकि इसमें आयरन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है।
पोषक तत्व : इसमें कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, पोटेशियम, मैगनीशियम, जिंक, थियामिन, नियासिन, फॉलेट, विटामिन ए और विटामिन के पाया जाता है।
फाइबर : कब्ज होने पर रोज रात को खजूर भिगो दें और सुबह पानी के साथ खा लें।
ये भी हैं फायदे -
हड्डियां : इसमें सेलेनियम, कॉपर व मैगनीशियम होते हैं जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं।
हार्ट फ्रैंडली : इसमें पोटेशियम काफी मात्रा में और सोडियम ना के बराबर होता है इसलिए यह दिल और नर्व सिस्टम को दुरुस्त रखता है।
इतने खाएं : डाइटीशियन के अनुसार खजूर की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्मी से अगर फोड़े-फुंसियां हो रहे हों तो इन्हें ना खाएं। गर्मी के दिनों में एक व सर्दी के दिनों में चार खजूर खा सकते हैं।


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सीढ़ियों से पाएं सेहत की मंजिल, जानें कैसे(Sidhiyon se paen sehat kee manjil, jaanen kaise)

December 30, 2018
Sidhiyon se paen sehat kee manjil, jaanen kaise


Sidhiyon se paen sehat kee manjil, jaanen kaise


सही तरीके से सीढ़ियां चढ़ने-उतरने से आपका दिल और फेफड़े स्वस्थ व सुरक्षित रहते हैं। सीढ़ियां चढ़ने व उतरने से ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन शरीर में पहुंचती है और दिल की धड़कन भी सही चलती है। ऑक्सीजन सही मात्रा में पहुंचने से बॉडी में ब्लड का सर्कुलेशन अच्छी तरह होता है और आप फिट महसूस करते हैं। जॉगिंग, साइक्लिंग, स्वीमिंग और टेनिस की तरह सीढ़ियां चढ़ना भी एक बेहतरीन वर्कआउट है।
हार्ट बीट रखता है नॉर्मल -
यह एक ऐसी एक्सरसाइज है जिसके नतीजे एक हफ्ते में ही दिखने लग जाते हैं।
एड्रेनलिन हार्मोन को एक्टिव करने में यह वर्कआउट खास भूमिका निभाता है। यह हार्मोन हृदय की मांसपेशियों का ब्लड सर्कुलेशन बनाए रखने और हार्ट बीट को नॉर्मल रखने के लिए जरूरी होता है।
ऊपर चढ़ने के दौरान जब बॉडी का 70-85 डिग्री का एंगल बनता है तो यह पॉश्चर लोअर बॉडी के लिए और 135 डिग्री का एंगल अपर बॉडी के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
एक घंटे में इससे 700 कैलोरी तक बर्न की जा सकती है। इससे बॉडी शेप में आती है और मसल्स की टोनिंग होती है।
कम होती है चर्बी -
सीढ़ियां चढ़ना एक कुदरती व्यायाम है। इससे आपकी थाई तो शेप में रहती ही है, साथ ही मांसपेशियों में भी लचीलापन आता है। इससे कमर के निचले हिस्से में जमा चर्बी कम होती है और आपका वजन घटता है। सीढ़ियां चढ़ना एकदम फ्री एक्सरसाइज है जिसमें कुछ भी खर्च नहीं होता है। इससे आपका तनाव दूर होता है क्योंकि इस एक्सरसाइज के बाद नहाने से भूख भी लगती है और नींद भी अच्छी आती है।
क्या आप जानते हैं -
हर दिन सीढ़ियां चढ़ना-उतरना बीमारियों से लडऩे की शक्ति को 40 फीसदी तक बढ़ा सकता है।
रोजाना केवल एक मंजिल सीढ़ियां चढ़ते-उतरते हैं तो वह आधे किलोमीटर ट्रेडमिल पर चलने के बराबर हो जाता है।
सीढ़ियों के उपयोग से शरीर में तुरंत एनर्जी आ जाती है जो जिम में 5 से 7 मिनट व्यायाम करने के बाद आ पाती है।
आप ना करें -
जिन लोगों को अस्थमा, हृदय रोग और घुटनों की समस्या हो, वे इस वर्कआउट को ना करें।
ध्यान रखें : लंबे समय तक इस तरह का वर्कआउट डॉक्टरी सलाह से ही करें। सीढ़ियां चढ़ने या उतरने पर अगर आपकी सांस फूलने लगे, सीने में दर्द, घुटने में तकलीफ या अन्य कोई परेशानी महसूस हो तो इसकी बजाय समतल स्थान जैसे पार्क, बगीचे आदि में ही टहल लें।


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Fitness samachar - दर्द की नहीं, चाेट ठीक हाेने की प्रोसेस है इन्फ्लेमेशन(Dard ki nahin, chaot thik hone kee proses hai inflemeshan)

December 30, 2018
Dard ki nahin, chaot thik hone kee proses hai inflemeshan


Dard ki nahin, chaot thik hone kee proses hai inflemeshan


हम अक्सर दर्द भरे घुटनों या जली हुई स्किन के आसपास फैली लालिमा, सूजन व दर्द को इन्फ्लेमेशन समझते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। जब शरीर किसी भी बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचने के लिए प्रतिक्रिया करता है तो इसे इन्फ्लेमेशन कहते हैं।
घाव भरता है :
चोट लगने पर इम्यून सिस्टम क्षति को कंट्रोल करने के लिए तेजी से कई प्रक्रियाएं शुरू करता है, इसे एक्यूट (शॉर्ट टर्म) इन्फ्लेमेशन कहते हैं। सबसे पहले चोटिल हिस्से की ओर रक्त प्रवाह बढ़ता है, इससे वाइट ब्लड सेल्स बैक्टीरिया को नष्ट कर संक्रमण होने से रोकते हैं। इस तरह इन्फ्लेम्ड स्किन गर्म महसूस होती है क्योंकि हीलिंग प्रक्रिया तेज हो जाती है।
ऐसे होगी सुरक्षा
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में इन्फ्लेमेटरी डिसऑर्डर होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके लिए शुरू से ही सही जीवनशैली अपनाएं। ओमेगा-3 फैटी एसिड, अदरक, हल्दी, काली मिर्च जैसे मसालों का प्रयोग करें। नशा ना करें और वजन कंट्रोल में रखने के लिए नियमित व्यायाम करें।


Fitness samachar - दर्द की नहीं, चाेट ठीक हाेने की प्रोसेस है इन्फ्लेमेशन(Dard ki nahin, chaot thik hone kee proses hai inflemeshan) Fitness samachar - दर्द की नहीं, चाेट ठीक हाेने की प्रोसेस है इन्फ्लेमेशन(Dard ki nahin, chaot thik hone kee proses hai inflemeshan) Reviewed by health on December 30, 2018 Rating: 5

ज्यादा चीनी का सेवन दिल के लिए है घातक(Jyada cheeni ka sevan dil ke lie hai ghaatak)

December 30, 2018
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ज्यादा चीनी खाने से आपका दिल खतरे में पड़ सकता है। एक वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट ने शोध के हवाले से बताया कि ज्यादा चीनी का सेवन करने वाले लोगों में दिल के दौरे का खतरा चार गुना बढ़ जाता है। 40 हजार से अधिक लोगों पर किए गए इस शोध को जेएएमए इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है।
शोध के नतीजे -
चीनी युक्त सिर्फ आधा लीटर पेय पीने से ही दिल के दौरे का खतरा लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। चीनी के इस्तेमाल से इंफ्लेमेशन(जलन) बढ़ती है जो कि हृदय रोगों की जड़ है।
खतरे और भी कई -
शोध में पाया गया कि दिल के दौरे के लिए सिर्फ चीनी ही नहीं कैलोरी, भोजन की खराब गुणवत्ता, धूम्रपान, कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा व शराब आदि दूसरे कारक भी जिम्मेदार होते हैं।
ध्यान रहे -
दिल की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए जरूरी है कि आप सब्जियों, फलों और सलाद को संतुलित रूप से अपने भोजन में शामिल करें। इनमें मौजूद फाइबर दिल के लिए उपयोगी होते हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम करने की आदत बनाएं। धूम्रपान, शराब या अन्य किसी भी प्रकार का नशा ना करें।
इतनी हो मिठास -
अगर हम एक हफ्ते में सात या उससे अधिक बार ज्यादा चीनी वाला पेय पदार्थ पीते हैं तो हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
दिनभर में हम दूध, चाय, जूस, शिकंजी या कोल्ड ड्रिंक के जरिए चीनी लेते रहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार चीनी की यह मात्रा छह टी-स्पून से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री होने पर चीनी का प्रयोग सावधानी से करें।


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Fitness samachar - मस्कुलर और फिट बॉडी के लिए एेसे करें जिम, कुछ ही दिनाें में दिखेगा असर/Maskular aur Fit body ke lie aise karen jim, kuchh hee dinon mein dikhega asar

December 30, 2018
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अच्छी बॉडी बनाने और पूरी तरह स्वस्थ रहने के लिए जिम जाना भी जीवनशैली का हिस्सा बन गया है। यदि आप जिम जाने की तैयारी कर रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखकर अपनी हैल्थ व पर्सनेलिटी में चार चांद लगा सकते हैं।
जिम का हो सही चुनाव
जिम के बाहरी दिखावे से आकर्षित होने से अच्छा है कि आप पहले पूरी जांच कर लें जैसे कि जिम की मशीनें कैसी हैं, ट्रेनर अच्छे हैं या नहीं। देख लें कि जिम की लोकेशन क्या है, यदि जिम ज्यादा भीड़भाड़ या प्रदूषित इलाके में हो तो ऐसी जगह जाने से बचें।
मोबाइल से रखें दूर की दोस्ती
वर्कआउट करते समय मोबाइल फोन से दूरी बनाएं रखें। अगर आप इसे ऑफ नहीं कर सकते, तो साइलेंट मोड पर रखें। हो सके तो व्यायाम के समय किसी भी तरह के गैजेट का प्रयोग ना करें।
सफाई का रखें खास खयाल
जिम में वर्कआउट के बाद अधिक पसीना आना लाजमी है। ऐसे में अपने साथ टॉवल लेकर जरूर जाएं। जिम से आने के बाद जब आपका तापमान सामान्य हो जाए तभी नहाने के लिए जाएं।
दूसरों को भी पूरा मौका दें
ट्रेडमिल हो या कोई अन्य मशीन, उस पर कब्जा जमाए मत रहिए। दूसरों को भी मौका दें। जिम के एटिकेट्स को फॉलो करना भी एक अच्छी और स्वस्थ परंपरा है। जिम के लिए आप किसी दोस्त को भी साथ ले जा सकते हैं, इससे आपको आलस भी नहीं सताएगा।
आउटफिट किस तरह का हो
हमेशा जिम के हिसाब से कपड़े पहनें। कपड़े न ज्यादा ढीले हों और न ही ज्यादा टाइट। अच्छे स्पोट्र्स शू के साथ टीशर्ट व लोअर बेहतर होगा। जिम में अपने साथ पानी की बोतल लेकर जाएं ताकि प्यास लगने पर आप साफ पानी ही पिएं।
एक्सरसाइज से पहले वॉर्मअप
चोट या खिंचाव आदि से बचने के लिए सबसे पहले बॉडी को वॉर्मअप करेेंं। इसके लिए ट्रेड मिल पर जॉगिंग, एरोबिक्स और स्ट्रेचिंग आदि से शुरुआत करें।
मेडिकल जांचें भी जरूरी
जिम जॉइन करने से पहले कुछ खास जांचें जैसे आपका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), ब्लड प्रेशर, पल्स रेट और हार्ट चेकअप करा लें। साथ ही अपना वजन, चेस्ट, आर्म और थाई आदि की माप भी ले लें ताकि एक महीने बाद आपको पता रहे कि आपने कितने इंच लूज किया है। पुरानी चोटों, कमर-जोड़ों के दर्द व बीमारियों के बारे में जिम संचालक को जरूर बताएं ताकि वे उसी हिसाब से एक्सरसाइज तय कर सकें।


Fitness samachar - मस्कुलर और फिट बॉडी के लिए एेसे करें जिम, कुछ ही दिनाें में दिखेगा असर/Maskular aur Fit body ke lie aise karen jim, kuchh hee dinon mein dikhega asar Fitness samachar - मस्कुलर और फिट बॉडी के लिए एेसे करें जिम, कुछ ही दिनाें में दिखेगा असर/Maskular aur Fit body ke lie aise karen jim, kuchh hee dinon mein dikhega asar Reviewed by health on December 30, 2018 Rating: 5

कहीं आपकी इच्छा ताे नहीं हाेती अपाहिज हाेने की !/Kaheen aapakee ichchha to nahin hotee apaahij hone kee !

December 29, 2018
Kaheen aapakee ichchha to nahin hotee apaahij hone kee !

Kaheen aapakee ichchha to nahin hotee apaahij hone kee !


शारीरिक रूप से स्वस्थ, शिक्षित, कामकाज में कुशल व्यक्ति, आर्थिक रूप से भी ठीक। उसकी सोच है कि उसका जो एक पांव है, उसे वहां नहीं होना चाहिए। वह पांव उसके दुख का कारण है। हालांकि उसका पांव नॉर्मल है और वह चलता, फिरता, उठता, बैठता है, सब काम करता है। लेकिन उस व्यक्ति का मानना है कि अगर उसका पांव हटा दिया जाए तो उसे सच्चे सुख की प्राप्ति होगी जो पांव की वजह से उसे नहीं मिल रहा। मनोचिकित्सकों के अनुसार यह एक मनोग्रंथि है, मानसिक रोग नहीं। वे इसे बॉडी इंटेग्रिटी आइडेंटिटी सिंड्रोम (शरीर की समग्रता,अखंडता के प्रति अनास्था सिंड्रोम) के रूप में चिन्हित करते हैं।
58 वर्षीय महिला च्लोयी जेनिंग्स कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में शोध वैज्ञानिक हैं। हट्टी-कट्टी व स्वस्थ आैर हर तरह से सक्षम, गाड़ी चलाती है, बर्फ पर तेज स्कीईंग करती हैं। उसकी अजीब इच्छा है कि उसके दोनों पांव लकवा ग्रस्त हो जाएं। इच्छा नहीं बल्कि अंतर्मन पर हावी एक विकृत विचार है। खुद को विकलांग मानकर, दिखाकर उसे आत्मसुख मिलता है। वह अक्सर घर व बाहर दोनों पांवों में कैलीपर पहनती है, व्हील चेयर या बैसाखी से चलती है। कैलीपर पहने व्हील चेयर से घर पहुंचते ही उसमें से निकलकर सीढिय़ां चढ़ेगी, दरवाजा खोल व्हील चेयर अंदर लेकर, फिर उसमें बैठ घर में रसोई, बाथरूम जाएगी। लोगों की नजरों में अजीब भाव देख उसे बुरा नहीं लगता है।
वह कहती है, 'मैं ऐसी ही हूं, ऐसे ही रहूंगी। ऐसे ही रहना चाहती हूं। पांवों से विकलांग अनुभव करना व दिखना मेरी मानसिक मजबूरी है। मैं जानती हूं यह गलत है, लेकिन इस पर मेरा जोर नहीं है।'
इसी तरह न्यूयॉर्क में सेटेलाइट इंजीनियर के पद से रिटायर्ड फिलिप बॉन्डी भी इसी सिंड्रोम से ग्रसित थे। वे सदा अपने एक पांव को अपने सुख में बाधा मानते थे। वे अपने आपको विकलांग के रूप में कल्पना कर आत्मसुख का अनुभव करते थे। सदा इच्छा रही कि अगर उनकी एक टांग काट दी जाए तो वे पूर्ण हो जाएं। वे मैक्सिको में प्रैक्टिस कर रहे कुख्यात सेक्स चेंज प्लास्टिक सर्जन जोह्न रोनाल्ड ब्राउन के पास पहुंचे। ब्राउन पहले अमरीका में ही ट्रांसजेंडर ट्रांस सेक्सुअल (किन्नर) की सस्ते में सेक्स चेन्ज सर्जरी करते थे।
डॉ. ब्राउन के पास न इसका प्रशिक्षण था, न लाइसेंस। गड़बड़ हुई, पकड़े गए, जेल हुई। ब्राउन ने जेल से छूटने के कुछ समय बाद ही मैक्सिको में वही प्रैक्टिस शुरू कर दी। उसने फिलिप बॉन्डी की एक टांग घुटने के ऊपर से काट कर हटा दी और उसे पास के एक होटल में छोड़ दिया। बॉन्डी कमरे में मृत मिले। ब्राउन को हत्या के दोषी पाए जाने पर लंबी जेल हुई। बॉन्डी अपनी मनोग्रंथि की बलि चढ़ गया।
तनाव व अवसाद की अवस्था में बॉडी इंटेग्रिटी आइडेंटिटी सिंड्रोम हाेने का खतरा ज्यादा हाेता है इसलिए किसी भी कल्पना काे अपने उपर हावी ना हाेने दें। सकारात्मक व स्वस्थ साेच रखें।


कहीं आपकी इच्छा ताे नहीं हाेती अपाहिज हाेने की !/Kaheen aapakee ichchha to nahin hotee apaahij hone kee ! कहीं आपकी इच्छा ताे नहीं हाेती अपाहिज हाेने की !/Kaheen aapakee ichchha to nahin hotee apaahij hone kee ! Reviewed by health on December 29, 2018 Rating: 5

तंदुरुस्त सेहत के लिए इस तरह से करें दालाें का सेवन/Tandurust sehat ke lie is tarah se karen Daalon ka sevan

December 29, 2018

Tandurust sehat ke lie is tarah se karen Daalon ka sevan


छिलके और धुली हुई दोनों प्रकार की दालों में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हमें चुस्त-दुरुस्त रखने में मददगार होते हैं।सेहत बनाने के मामले में भी दालें किसी से कम नहीं। दालों में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल होते हैं।
अंकुरित के फायदे
दालों के अलावा इनसे बनाए गए स्प्राउट्स (अंकुरित दालें) भी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। ये सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। स्प्राउट्स में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी1, विटामिन बी6 और विटामिन के पाया जाता है। इसमें आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम, मैगनीशियम, फास्फोरस, मैगनीज भी प्रचुर मात्रा में होता है। ताजा स्प्राउट्स पके हुए स्प्राउट्स से ज्यादा बेहतर होते हैं क्योंकि स्प्राउट्स को पकाने पर उसके कुछ एंजाइम नष्ट हो जाते हैं। स्प्राउट्स खाने के बाद ये आसानी से पच जाते हैं क्योंकि इसमें काफी मात्रा में एंजाइम पाए जाते हैं। जिन लोगों के पाचन तंत्र में समस्या हो उनके लिए स्प्राउट्स बेहतरीन विकल्प होते हैं।
दाल को बनाने से पहले उसे 5-6 घंटे के लिए भिगो देना चाहिए क्योंकि इससे उसके पोषक तत्वों में वृद्धि हो जाती है। दाल बनाते समय उसी पानी का प्रयोग करें जिसमें आपने दाल को भिगोया था। इससे उसका स्वाद बढ़ जाता है।
अरहर :
यह दाल कफ और खून के विकार को दूर करती है। इसमें प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, फास्फोरस, विटामिन ए व बी होते हैं।
उड़द:इसमें फास्फोरिक एसिड ज्यादा मात्रा में होता है। यह दाल कब्जनाशक और बल वर्धक होती है। हड्डी में दर्द होने पर इसे पीसकर लेप लगाने से फायदा होता है।
मूंग :इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट व रेशे पाए होते हैं। यह कफ व पित्त के मरीजों के लिए फायदेमंद है। यह आसानी से पच भी जाती है।

एक कटोरी दाल :
शाकाहारी लाेगाें के लिए प्रोटीन के सिर्फ दो स्रोत हैं दूध व दालें। इसलिए रोजाना कम से कम एक कटोरी दाल जरूर खानी चाहिए।
दिन में खाएं :
दालों का समूह गैस्ट्रिक होता है इसलिए रात के समय इन्हें खाने से इनके पोषक तत्व ठीक से एब्जोर्ब नहीं हो पाते। अगर आप शाम को छह से सात बजे तक खाना खा लेते हैं तो डिनर में दाल ले सकते हैं वर्ना दाल दिन के समय ही खाएं।
कॉम्बिनेशन :
दाल में एक प्रकार का अमिनो एसिड नहीं होता इसलिए सिर्फ दाल ना खाकर दाल-चावल या खिचड़ी के रूप में खाएं। कॉम्बिनेशन में लेने से यह कम्प्लीट प्रोटीन हो जाता है।
ध्यान रहे :किडनी के मरीजों को डॉक्टरी सलाह से ही दाल खानी चाहिए। जिन्हें डायबिटीज या मोटापे की समस्या हो उन्हें छिल्के वाली दालें ज्यादा खानी चाहिए क्योंकि इनमें फाइबर ज्यादा होता है।


तंदुरुस्त सेहत के लिए इस तरह से करें दालाें का सेवन/Tandurust sehat ke lie is tarah se karen Daalon ka sevan तंदुरुस्त सेहत के लिए इस तरह से करें दालाें का सेवन/Tandurust sehat ke lie is tarah se karen Daalon ka sevan Reviewed by health on December 29, 2018 Rating: 5
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